बुराड़ी : 11 मौतों की गुत्थी सुलझी, पुलिस का दावा घर से मिली डायरी और सीसीटीवी में दफन है मौत का सफर

दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिल्ली के बुराड़ी में एक ही घर के 11 लोगों की मौत का राज़ खुल गया है।

 

घर से मिली डायरी के पन्नों में दर्ज है मौत के इस सफ़र का एक-एक ब्योरा।

 

नई दिल्ली:

 

राजधानी दिल्ली सहित देश और दुनिया को झकझोर कर रख देने वाली बुराड़ी की सामुहिक 11 लोगों की मौत पर दिल्ली पुलिस का मुताबिक पर्दा उठ गया है। घर से मिली डायरी के पन्नों में मौत के इस सफ़र का एक-एक ब्योरा है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं, जिसमें इस मौत का सफ़र दिख रहा है। सीसीटीवी फुटेज में हादसे के पहले का तकरीबन पूरा मंजर कैद है। स्टूल लाते हुए नीतू और उसकी मां दिख रही हैं। सीसीटीवी फुटेज में यह भी दिख रहा है कि रात में 10.20 बजे घर में नीचे की फर्नीचर की दुकान से बच्चे तार लेकर ऊपर गए। भाटिया परिवार 6 स्टूल घटना वाले दिन रात में 10 बजे लाया था। बता दें कि पूरे परिवार को यकीन था कि उनके दिवंगत पिता आकर उन्हें बचा लेंगे।

 

भाटिया परिवार के घर से बरामद 11 रजिस्टरों में फांसी लगाने के तरीके और इससे जुड़ी हर क्रिया का तफ़सील से ज़िक्र है। घर से निकलने वाले 11 पाइपों और 11 एंगल वाले रोशदानों के साथ 11 रजिस्टर भी बरामद हुए हैं, जिनमें 10 साल पहले मरे पिता की आत्मा से संवाद की हर बातचीत दर्ज है। इसी ने इस हंसते खेलते परिवार को फांसी के फंदे पर ढकेला।

 

11 पाइप, 11 खिड़कियों के बाद पुलिस को कुल 11 रजिस्टर भी मिले हैं, जिनमें से 30 जून 2018 की आखिरी एंट्री इस घटना का राज़ खोलती है। डायरी में अंतिम एंट्री में एक पन्ने पर लिखा है ‘घर का रास्ता। 9 लोग जाल में, बेबी (विधवा बहन) मंदिर के पास स्टूल पर, 10 बजे खाने का ऑर्डर, मां रोटी खिलाएगी, एक बजे क्रिया, शनिवार-रविवार रात के बीच होगी, मुंह में ठूंसा होगा गीला कपड़ा, हाथ बंधे होंगे।’ इसमें आखिरी पंक्ति है- ‘कप में पानी तैयार रखना, इसका रंग बदलेगा, मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचाऊंगा।’

 

पुलिस ने बताया कि अभी तक कुल 11 रजिस्टर बरामद किए गए हैं। पिछले 11 साल से ललित के पिता उसके सपने में आ रहे थे. वह 2007 से, यानि 11 साल से अपने पिता की आवाज़ निकाल रहा था। परिवार के 11 सदस्यों के अलावा किसी को यह बात पता नहीं थी। पुलिस ने बताया कि घर में कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं मिला है, न ही कोई आध्यात्मिक पुस्तक मिली है। सिर्फ हनुमान चालीसा और गायंत्री मंत्र मिले हैं। घर में पूजा सात दिन से चल रही थी। खुदकुशी के लिए 9 लोगों ने 5 स्टूलों का इस्तेमाल किया था। छठा स्टूल प्रतिभा को इस्तेमाल करना था. प्रियंका को सेंटर में रखना था।

 

पुलिस के मुताबिक सब कुछ एक्सीडेंटल हुआ, क्योंकि रजिस्टर में लिखा था कि इस प्रक्रिया के बाद हाथ खोलने थे। जैसा कि रजिस्टर में लिखा है, उनका विश्वास था कि इस प्रक्रिया से उनकी शक्तियां बढ़ जाएंगी। प्रकिया के बाद सबको एक-दूसरे की हाथ खोलने में मदद करनी थी।

 

पुलिस ने बताया कि रजिस्टरों में तीन से चार हैंडराइटिंग मिली हैं। रजिस्टर में ललित बोलता था और ज्यादातर प्रियंका लिखती थी। 24 जून से पूजा शुरू की गई थी। ललित को घर के लोग काका कहते थे और सपने में आने वाले उसके पिता को पूरा घर डैडी कहता था। ललित पूरे घर को धमकी देता था कि अगर ऐसा नही किया तो डैडी ऐसा कर देंगे। इस वजह से पूरा घर उसकी कोई बात नहीं टालता था। फांसी लगाने के लिए जिन चुन्नी और कपड़ों का इस्तेमाल हुआ वो भी टीना और उसकी मां उसी दिन दिन के समय पास के ही बाजार से लाये थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *