मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का इस्तीफा, अरूण जेटली ने दी जानकारी

नई दिल्ली :

 

देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ‘पारिवारिक प्रतिबद्धताओं’ की वजह से अपना पद छोड़ रहे हैं और अमेरिका लौट रहे हैं। अरविंद सुब्रमण्यन के इस फैसले की जानकारी केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दी। सुब्रमण्यन को 16 अक्टूबर, 2014 को वित्त मंत्रालय में तीन साल के कार्यकाल के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया था।

 

जेटली ने लिखा है, “कुछ दिनों पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन की मुझसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुलाकात हुई थी। उन्होंने मुझे बताया कि वो पारिवारिक प्रतिबद्धताओं की वजह से अमेरिका वापस जाना चाहते हैं। उनका कारण निजी मगर उनके लिए बेहद जरूरी था। उन्होंने मुझे ऐसा कहकर विकल्प विहीन बना दिया, बावजूद इसके मैंने अपनी सहमति दे दी”। इसके साथ ही जेटली ने बताया कि सुब्रमण्यन अक्टुबर में अमेरिका से लौटेंगे।

 

अक्टूबर 2014 में अरविंद सुब्रमण्यन की तैनाती इस पद पर तीन साल के लिए हुई थी। बाद में कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें कुछ और दिनों का सेवा विस्तार मिला था। जेटली ने लिखा है, “अरविंद ने मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर तीन साल के लिए 16 अक्टूबर 2014 को ज्वाइन किया था। तीन साल पूरा होने पर मैंने उनसे अनुरोध किया था कि आप कुछ दिन और इस पद पर रहें। हालांकि, तभी मुझे अरविंद ने कह दिया था कि वो पारिवारिक प्रतिबद्धताओं और नौकरी के मंझधार में फंस गए हैं”।

 

 

जेटली ने लिखा है, “अरविंद वित्त मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य मंत्रालयों के बीच आर्थिक मुद्दों पर सरकार से विचार विमर्श करते थे। संवाददाताओं के साथ त्वरित संचार की वजह से वो काफी प्रभावशाली थे। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का पद बहुआयामी होता है। हालांकि, वह भारत सरकार के प्रवक्ता नहीं थे। वह केवल सलाहकार थे, जिन्हें विभिन्न मुद्दों पर सरकार को सलाह देना और किसी मुद्दे पर बहुत दूर तक उसके प्रभावों के बारे में सोचना था”।

 

जेटली ने भारतीय अर्थव्यवस्था के वृहद आर्थिक प्रबंधन के लिए सुब्रमण्यन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘व्यक्तिगत रूप से मुझे उनके व्यक्तित्व , ऊर्जा, बौद्धिक क्षमता और विचारों की कमी खलेगी। एक दिन में वह कई बार मेरे कमरे में आकर मुझे ‘मिनिस्टर’ कहकर बुलाते थे। कभी वह अच्छी खबर देते तो कभी दूसरे तरह का समाचार देने आते थे। निश्चित रूप से मुझे उनकी कमी खलेगी। मुझे विश्वास है कि वह कहीं भी होंगे वहां से अपनी सलाह या विश्लेषण भेजते रहेंगे।’

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