नेहरू को ‘आत्मकेंद्रित’ व्यक्ति बताए जाने पर दलाई लामा ने मांगी माफी

नई दिल्ली:

 

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने जवाहर लाल नेहरू को आत्मकेंद्रित व्यक्ति और देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार बताए जाने संबंधी अपने बयान पर आज माफी मांग ली। दलाई ने कहा कि अगर मेरा बयान में कुछ गलत था, तो मैं उसके लिए माफी मांगता हूं।

 

आपको बता दें कि बुधवार को दलाई लामा ने गोवा के कार्यक्रम के दौरान प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू और पाकिस्तान के जनक जिन्ना को लेकर एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि, महात्मा गांधी चाहते थे कि मोहम्मद अली जिन्ना देश के शीर्ष पद पर बैठें, लेकिन पहला प्रधानमंत्री बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू ने मना कर दिया।

दलाई लामा के इस बयान पर काफी हंगामा हुआ था। आध्यात्मिक गुरु के इस बयान के बाद कई राजनीतिक दलों ने इस बयान पर आपत्ति जताई थी। आपको बता दें कि बुधवार (8 अगस्त) को कार्यक्रम में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने ये बयान दिया था।

 

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अपने बयान में उन्होंने कहा था कि मेरा मानना है कि सामंती व्यवस्था के बजाय प्रजातांत्रिक प्रणाली बहुत अच्छी होती है। सामंती व्यवस्था में कुछ लोगों के हाथों में निर्णय लेने की शक्ति होती है, जो बहुत खतरनाक होता है। उन्होंने कहा कि अब भारत की तरफ देखें। मुझे लगता है कि महात्मा गांधी जिन्ना को प्रधानमंत्री का पद देने के बेहद इच्छुक थे, लेकिन पंडित नेहरू ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर गांधी जी की यह इच्छा पूरी हो जाती तो भारत का विभाजन ही नहीं होता। पंडित नेहरू काफी अनुभवी और बुद्धिमान थे लेकिन उनसे कुछ गलतियां भी हुईं।

 

दलाई लामा ने ये भी कहा कि सामंती की बजाय लोकतांत्रिक व्यवस्था ज्यादा बेहतर होती है। सामंती व्यवस्था में फैसला लेने का हक केवल कुछ लोगों के हाथ में होता है जो ज्यादा खतरनाक है।

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