अब और माताएँ नहीं मरेंगी ! प्रसव के दौरान मातृत्व मृत्यु दर में 22% की कमी

नई दिल्ली (रिपोर्ट -योगीराज) : भारत में प्रसव के दौरान मरने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी से कमी आई है। इसके साथ ही अस्पतालों में प्रसव के आकंड़ों में वृद्धि हुई है। मतलब ये की अब अधिक से अधिक बच्चों का जन्म अस्पतालों में हो रहा है।

भारत के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के आंकड़ों के मुताबिक, मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), जो 2011-13 में 167 थी, 2014-16 में घटकर 130 रह गई। किसी देश की प्रगति को आँकने के लिए विश्लेषकों और विकासवादी अर्थशास्त्रियों द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले इस महत्वपूर्ण पैमाने (एमएमआर) पर यह सुधार एक बड़ी उपलब्धि है।

एमएमआर को प्रति 100,000 जीवित जन्मों के सापेक्ष हुई मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है। 2013 से एमएमआर में 22% की कमी का मतलब है कि भारत में गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न जटिलताओं से मरने वाली महिलाओं में अब हर महीने एक हज़ार कम महिलाएं मृत्यु का शिकार होती हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस सुधार के लिए मुख्य रूप से देश भर में संस्थागत प्रसवों की वृद्धि को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाले विभाग बाल मंत्रालय के उपायुक्त डॉ अजय खेरा कहते हैं, “यह सचमुच हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है और इसमें एक प्रमुख योगदान कारक यह है कि अब लगभग 80% महिलाएं बच्चों को अस्पतालों में जन्म दे रही हैं फिर चाहे अस्पताल सार्वजनिक हों या निजी। यदि आप एक दशक पुराने आँकड़ों पर नज़र डालें तो यह संख्या तब लगभग 40% ही थी।”

“सार्वजनिक अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएँ भी पहले से बेहतर हुई हैं और कुछ अन्य प्रोत्साहनों के अलावा अब हम गर्भवती महिलाओं को मुफ्त दवाएं और निदान भी दे रहे हैं, जिससे साल-दर-साल प्रसव के लिए अस्पतालों में आने वाली महिलाओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।”

भारत और अन्य विकासशील देशों में मातृ मृत्यु दर जन-स्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या है। कारणों में प्रसव पश्चात होने वाली अत्यधिक रक्त हानि और संक्रमण प्रमुख हैं, क्योंकि महिलाएं साधारणतया अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए नहीं आतीं।

पोस्ट-पार्टम हेमोरेज यानी आमतौर पर प्रसव के बाद पहले 24 घंटों के भीतर 500-1,000 मिलीलीटर से ज़्यादा होने वाली रक्त की हानि मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है।

भारत में, सरकारी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों पर आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए परिवहन की सुविधा भी मुफ़्त है, जिससे महिलाओं और उनके परिवारों का अतिरिक्त व्यय न हो। यही नहीं – बीमार नवजात बच्चों का इलाज भी मुफ़्त में किया जाता है (निदान, दवाओं, उपभोग्य सामग्रियों, आहार, परिवहन सुविधाओं सहित)।

खेरा के अनुसार “संस्थागत प्रसव में वृद्धि के अलावा, अन्य कारकों में निजी चिकित्सकों द्वारा सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को मुफ्त स्वास्थ्य जांच प्रदान करने के लिए शामिल किया जाना, बाल विवाह में कमी, किशोरावस्था में गर्भधारण में 50% तक की कमी, और अधिक-से-अधिक महिलाओं के एनीमिया का इलाज प्रमुख रहे हैं”।

मैक्स हेल्थकेयर में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और प्रसव चिकित्सक डॉ अनुराधा कपूर कहती हैं, “अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव, संक्रमण और एनीमिया बाल जन्म के दौरान मौत के प्रमुख कारण हैं, विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं में, और ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता होती है। जीवन बचाने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

“दक्षिणी राज्य एमएमआर पर देश के बाकी राज्यों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन राज्यों में एमएमआर 93 से घटकर 77 हो गया है, जो सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत 2030 तक देश में मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को 70 तक ले आने के लक्ष्य के काफ़ी करीब है”।

खेरा कहते हैं, “हमारी प्रगति अच्छी और संतोषजनक है और हम 2030 तक एमएमआर को 70 तक ले आने के लक्ष्य की प्राप्ति को लेकर आशावान हैं”।

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