रांची: मिशनरी ऑफ चैरिटीज के ‘निर्मल हृदय’ से बेचा गया एक बच्चा बरामद

रांची :

 

मदर टेरेसा की ओर से स्थापित किए गए ‘मिशनरी ऑफ चैरिटी’ से जुड़े होम ‘निर्मल हृदय’ से नवजात शिशुओं को बेचने का खुलासा होने के बाद हर दिन इस मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

 

झारखंड की राजधानी रांची के जेल रोड स्थित ‘निर्मल हृद्य’ से बेचे गए एक नवजात को आज झारखंड पुलिस ने बरामद कर लिया गया। रांची के मोरहाबादी के हरिहर सिंह रोड से इस बच्चे को कोतवाली पुलिस ने बरामद किया। जानकारी के मुताबिक इस बच्चे को हरिहर सिंह रोड निवासी ओमेंद्र कुमार सिंह और दीपधारी देवी को 50,000 रुपए में बेचा गया था।

 

रांची के सिटी एसपी अमन कुमार ने नवजात को बरामद किए जाने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि इस नवजात को बेचने की डील रांची के सदर अस्पताल में हुई थी। तब एक नाबालिग ने 31 दिसंबर 2017 को सदर अस्पताल में इस नवजात को जन्म दिया था। नवजात को जन्म देने के दो दिन बाद ही उसकी मां उसे छोड़ कर चली गई थी। इस मामले में ओमेंद्र और दीपधारी देवी को भी पुलिस ने अभियुक्त बनाया था।

 

पुलिस ने जब दविश दी तो संबंधित दंपती नवजात को घर में ही छोड़कर भाग गए। पुलिस ने बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) लापता बच्चों का पता लगाने के लिए उन अविवाहित माताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जिन्होंने ‘निर्मल हृदय’ में शरण लेकर बच्चों को जन्म दिया था।

 

दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा – मुख्यमंत्री

 

झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े सभी सेंटरों की जांच कराने पर जोर दिया है। इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव को भी चिट्ठी लिखी गई है।

उधर मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी कहना है कि नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त के मामले में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

 

एसएसपी अनीश गुप्ता का कहना है कि पुलिस इस प्रकरण से जुड़े हर पहलु की गहराई से जांच कर रही है। शासन का कहना है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के सभी केंद्रों की सीआईडी से जांच कराई जाएगी। फिलहाल पांच बाल गृह को काली सूची में डाला गया है। पुलिस को आशंका है कि नवजातों की बिक्री में कोई संगठित गिरोह भी सक्रिय हो सकता है।

 

बताया जा रहा है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी से जुड़े होम्स में 2015 से 2018 के बीच 450 गर्भवती महिलाओं को भर्ती कराया गया था। लेकिन उनमें से सिर्फ 170 नवजात शिशुओं का ही डिलिवरी रिकॉर्ड मिला. बाकी 280 के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

 

जहां तक रांची की बात है तो जिला प्रशासन की जांच में सामने आया है कि यहां ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ से जुड़े संस्थान में वर्ष 2017 में 26 नवजातों का जन्म हुआ। इनमें दो की मौत हो गयी, जबकि 24 बच्चों का कोई पता नहीं है ना ही उनके बारे में किसी तरह की जानकारी संस्था के रजिस्टर में दर्ज है।

 

कैसे हुआ मामले का भांडाफोड़

 

पूरा मामला तब सामने आया था जब इस साल मई में मिशनरी ऑफ चैरिटी से जुड़े होम से एक नवजात शिशु को एक दंपती ने 1.20 लाख रुपए में बच्चा लिया था। इस दंपती से नवजात के जन्म और चिकित्सा देखभाल के नाम पर ये रकम ली गई थी। दंपती का आरोप है कि चैरिटी संस्थान की ओर से ये आश्वासन देकर बच्चा वापस ले लिया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चा लौटा दिया जाएगा। जब बच्चा वापस नहीं मिला तो दंपती ने इसकी शिकायत चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को कर दी।

 

नवजातों की बिक्री के आरोप को लेकर पुलिस ने मिशनरी ऑफ चैरिटी की ओर से संचालित होम की एक कर्मचारी अनिमा इंद्रवार और सिस्टर कोंसीलिया को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस इनसे आगे पूछताछ के रिमांड पर लेने के लिए अर्जी देगी. पुलिस ने संस्थान की एक और सिस्टर मेरी को भी पूछताछ के लिए बुलाया।

 

रांची कोतवाली पुलिस से मिल रही जानकारी के मुताबिक अब तक चार बच्चों को बेचे जाने की जानकारी मिली है जिनमें से तीन बच्चों को झारखंड में और एक बच्चे को उत्तर प्रदेश में बेचा गया।

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