मुजफ्फरपुर घटना पर नीतीश ने तोड़ी चुप्पी, कहा हम शर्मिंदा हैं

पटना:

 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की और ऐसी घटनाएं दोबारा होने से रोकने के लिए संस्थागत प्रणाली विकसित करने की जरुरत पर जोर दिया।

 

लड़कियों के कल्याण के लिए, “मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना” कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य द्वारा वित्तपोषित बालिकागृह में नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की। कुमार ने कहा, “मुजफ्फरपुर में एक घटना सामने आई है। इस घटना ने “हमें शर्मिंदगी और अपराध बोध” का एहसास कराया है।

 

यौन उत्पीड़न कांड का खुलासा होने के बाद से पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों के परामर्श के साथ संस्थागत प्रणालियां विकसित करने को कहा है।

 

नीतीश कुमार ने कहा, “हमने हमेशा से कहा है कि अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी विधानसभा में कहा था कि हम खुद चाहते हैं कि उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच हो।”

 

उन्होंने कहा, “यह जरूरी है क्योंकि समाज में सभी तरह के लोग रहते हैं और वे एक छोटा सा मौका मिलते ही गलत काम में शामिल हो सकते हैं।”

 

बालिका गृह में रहने वाली 42 में से 34 लड़कियों के चिकित्सकीय परीक्षण में उनके साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। एनजीओ ‘सेवा संकल्प एवं विकास समित’ द्वारा चलाए जा रहे बालिका गृह का मालिक बृजेश ठाकुर इस मामले में मुख्य आरोपी है।

 

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (टीआईएसएस), मुम्बई द्वारा अप्रैल में राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सबसे पहले सामने आया था।

 

इस मामले में 31 मई को 11 लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। ठाकुर समेत 10 लोगों को तीन जून को गिरफ्तार किया गया था। एक व्यक्ति फरार है।

 

बिहार पुलिस ने 26 जुलाई को इन आरोपियों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। राज्य सरकार ने 26 जुलाई को इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी और बाद में सीबीआई ने इसकी जांच राज्य पुलिस से अपने हाथ में ले ली थी।

 

कार्यक्रम में बिहार समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा भी मौजूद थीं जो मामले में अपने पति का नाम सामने आने के बाद से विवाद के केंद्र में हैं।

 

संवाददाताओं ने जब वर्मा की टिप्पणी जाननी चाही तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और उनके अंगरक्षक ने मीडियाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की।

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